[Ethics] Absenteeism, Racism, Academic Corruption & Superstition Case Studies & News from June Week2

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Mrunal’s UPSC GSM3-2020 Model Answer lecture: Science Technology, Internal Security Border Management Questions from last Mains Exam Solved!

Creating new Officers’ Cadre:

Scams in Banks (Yes Bank, PMC-Punjab Maharashtra cooperative bank, PNB-NiravModi, ICICI-Videocon) & NBFC like ILFS, DHFL. Reform? RBI suggested a Officer cadre called “specialised supervisory and regulatory cadre (SSRC)” in 2019. Original idea was to depute the existing RBI officers into this duty. But RBI officer association is opposed to this idea alleging it was prepared without detailed study, lacked clarity, vision and experience. Points to Consider? 1) our RBI officers worried that their promotion and transfer will be affected by this parallel hierarchy 2) Will it not be possible to increase the powers of the existing RBI and SEBI officers instead of creating a new cadre? 3) will It not result in interagency-conflict is similar to CBI VS NIA vs Local Police? 4) increase the cost of recruitment and salaries 5) as RBI governor what other options do you have or if you think this is the right decision how will you get it implemented? विभिन्न बैंकिंग और ग़ैर बैंकिंग कंपनियों में धांधलियों के बाद रिज़र्व बैंक ने निगरानी और नियंत्रण के लिए अफ़सरों की एक अलग कैडर बनाने का प्रस्ताव रखा था किंतु रिज़र्व बैंक के खुर के अफ़सर इसका विरोध कर रहे हैं कि यह बिना गम्भीर जाँच सर्वेक्षण किए एसे ही हवाबाज़ी मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए रखा गया है। क्योंकि रिज़र्व बैंक तथा सेबी के वर्तमान अफ़सरों को उनकी वर्तमान जगह पर ही अधिक सताए देकर इन धांधलियों को रोका जा सकता है अलग 1 नया ऑफ़िसर कैडर बनाने पर तनख़्वाह का बोझ बढ़ेगा और विभिन्न संस्थाओं के बीच आपसी संघर्ष में बढ़ोतरी होगी जैसा कि CBI और स्थानीय पुलिस के बीच होता है। रिज़र्व बैंक के गवर्नर के रूप में आप इस समस्या को कैसे संबोधित करेंगे?
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Fake caste certificate:

Amravati MP Navneet Kaur-Rana contested election using fake SC caste certificate. Bombay HC confiscated it so her victory will be cancelled. Point to consider? 1) Victory through any means – in competitive exams, job selection, elections, business = difficult to expect corruption free society. 2) If a person has secured a government job/ political victory through fake certificate then- he would engage in corrupt practices to recover his investment in buying the fake certificate 3) even if he does not want to do corruption and he may be blackmailed by the other persons who helps him acquire the fake certificate. 4) it deprives the meritorious person from the reserved community to get selected. लोकसभा चुनाव में दलित समाज के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए एक सांसद ने फ़र्ज़ी जातिप्रमाण पत्र निकलवाया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसके प्रमाणपत्र को रद्द किया। आज कल परीक्षा नौकरी चुनाव व्यापार- हर जगह किसी भी तरीक़े से जीत हासिल करने की मनोकामना हमें भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण नहीं करने देगी। जो व्यक्ति ख़ुद नक़ली प्रमाण पत्र के द्वारा सरकारी नौकरी या से चुनाव जीता है वो नक़ली प्रमाण पत्र ख़रीदने में हुए पैसों के निवेश को वसूल करने के लिए अवश्य रूप से भ्रष्टाचार करेगा। यदि वह भ्रष्टाचार न अभी करना चाहे तो जिन लोगों ने उसे नक़ली प्रमाण पत्र बनवा के लिया है वे लोग भी उसे ब्लैकमेल करके अपने ग़लत काम करवाएँगे। इस प्रकार की धाँधली से जिन्हें वास्तविक रूप से आरक्षण मिलना चाहिए वे पद के लाभ से वंचित रह जाएंगे

England fast bowler Ollie Robinson

suspended from cricket matches for old racist and sexist posts. E.g. “My new Muslim friend is the bomb; “I wonder if Asian People put smileys like this ¦)”, “The guy next to me on the train definitely has Ebola.” However, British PM Boris Johnson believes that “England cricket board has given excessive punishment. When he had written those comments he was a youngster. After 10 years his emotional maturity has increased and he has since apologised. So he should not have been suspended.” Counterview: 1) Ollie was 18 years old when he had tweeted those offensive messages. An 18-year-old person who is eligible to drink liquor, drive car, vote in election- then he’s supposed to behave in a responsible and respectful manner on a public platform 2) if cricketers are allowed to go scot-free then it sets the wrong precedent for their followers. They will also think it is okay to write such offensive messages, say sorry= all will be forgiven. इंग्लैंड के क्रिकेट बॉलर रॉबिंसन ने आज से 10 साल पहले अभद्र, आपत्तिजनक, वंशीय, तथा महिला विरोधी ट्वीट किये थे। 10 साल बाद वापसी ट्विटर पर उन गले मुर्दों को निकाल कर हंगामा किया गया, तो इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने रॉबिंसन को सस्पेंड किया है। हालाँकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का मानना है कि आवश्यक रूप से क्रिकेटर पर ज़रूरत से ज़्यादा सख़्ती दिखाई गई है। आज से 10 साल पहले वो नौजवान था उसमें भावनात्मक परिपक्वता पता नहीं। अब तो उसने माफ़ी भी माँग ली है तो उसे सस्पेंड नहीं करना चाहिए।विरोध में तर्क? आज से 10 साल पहले भी वो क्रिकेटर अठारह साल का था, दूध पीता बच्चा नहि था, तो उसने ज़िम्मेदारी से बयान देने चाहिए थे। यदि बॉडी क्रिकेटरों को भी बकश दिया जाएगा तो उनके भक्त समर्थक यह सोचेंगे कि ट्विटर पर अश्वेतों के ख़िलाफ़, एशियाई मूल के व्यक्तियों के ख़िलाफ़, अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़, महिलाओं के ख़िलाफ़ कुछ भी आपत्तिजनक बयान रखना कोई बड़ी बात नहीं है माफ़ी माँग लेंगे। तो इससे सोशियल मीडिया में ज़हर /उपद्रव बढ़ेगा।

Racism in injury compensation:

AMERICAN National Football League (NFL) players open get head injuries during the game play = it causes dementia and other mental disorders. The sporting federation will pay them compensation but they have to prove that indeed their mental capacity has decreased. But if a black / African players’ cognitive/IQ skills tests are low then he may be denied compensation on the grounds that such low result are “normal” for their race. Social Media/ Public campaign going on against this racist practice. अमरीकी फ़ुटबॉल में सर पर चोट लगने से खिलाड़ी की मानसिक क्षमता कम होती है तब उसे मुआवज़े के रूप में पैसा दिया जाता है, किन्तु खिलाड़ी ने यह साबित करना होता है कि वास्तव में उसकी मानसिक क्षमता कम हुई है। यह पाया गया कि अमरीकी फ़ुटबॉल फेडरेशन द्वारा अश्वेत खिलाड़ियों की सर-चोट-मुआवज़ा-अर्ज़ी सामान्य रूप से ख़ारिज कर दी जाती है की तुम अश्वेत लोग तो वैसे भी कम मानसिक क्श्म्त वाले हो, इसलिए स्तर पर चोट लगने से तुम्हारी मानसिक क्षमता कम हुई है ये विविध परीक्षणों से साबित नहीं हो रहा। सोशल मीडिया में इस वंशवाद के ख़िलाफ़ हंगामा हो रहा है

Vaccine Compulsion:

Madhya Pradesh’s Niwari district policemen conducting checks on roads. Those who not vaccinated are made to wear posters with message: “Mujhse dur rahein, maine abhi corona ka tika nahi lagwaya (Stay away from me, I haven’t got vaccinated for Covid) and also made to take an oath that they would get vaccinated within two days. Whereas those who are vaccinated = they are given national flag and badge: “Mein saccha deshbhakt hoon kyunki maine corona ka tika lagwaya hai (I am a true patriot because I have been vaccinated).” Points to consider 1) there is still a shortage of vaccine in many parts of India so without investigating why a person has not been in vaccinated, simply humiliating him with a poster/blackface = injustice. 2) if check posts were created to detain the non-vaccinated person, then police could also arrange a doctor/nurse to give vaccine to such people on the spot! मध्य प्रदेश में पुलिस वाले के रास्ते पर नाकाबंदी कर लोगों को रोक कर पूछताछ करते हैं जिन लोगों ने वैक्सीन लिया है उनको राष्ट्रध्वज और स्टिकर दिया जाता है कि “मैं देश भक्त क्योंकि मैंने वैक्सीन लिया है”। – जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लिया उनके गले पर पोस्टर डाल दिया जाता है कि “मुझसे दूर रहे”. ग़ौर करने के विषय- जब वैसे भी वैक्सीन की क़िल्लत है तो बिना जाँच पड़ताल कीये किसी व्यक्ति को जलील/बेज्जत करना उचित नहीं-यह भी तो संभव है कि ग़रीब आदमी के पास इंटरनेट नहीं, जानकारी नहीं, उसके गाँव में टीकाकरण ही नहीं हो रहा है इसलिए वो टीका नहीं लगवा पाए। और यदि पुलिस इतने ही उत्साह में है तो नाकाबंदी में डॉक्टर और नर्स को भी साथ में खड़ा रखा जाए ताकि जिन लोगों ने टीका नहीं लगवाया है उन सबका उसी वक़्त उसी स्थान पर टीकाकरण भी हो जाए।

Choice of words:

1) Gujarat Edu Board directive: class 10 students who are passed without exam due to Corona = write phrase “passed by mass promotion” in school leaving certificate. Later public protests that such phrase is humiliating, it may result in ostracization of the student in the future years in college admission/jobs/career. So, Gujarat Edu Board replaced the phrase with “secondary education complete”. शब्दों का अनुचित प्रयोग- गुजरात में दसवीं कक्षा में बिना परीक्षा दिए जिन बच्चों को पास किया गया है उनके स्कूल प्रमाण पत्र में “सामूहिक तरक़्क़ी में पास किया है”- शब्द प्रयोग होना था लोगों ने विरोध किया कि ये तो एक प्रकार से लांछन रूप शब्द है- भविष्य में इन विद्यार्थियों को कॉलेज दाख़िले में नौकरी पाने में दिक़्क़त आ सकती है इसलिए अब गुजरात शिक्षा बोर्ड ने तय किया कि स्कूल प्रमाण पत्र में “माध्यमिक शिक्षा समाप्त” – यह शब्द का प्रयोग किया जाएगा

SHRI PARAS Hospital

“mock drill” viral video where doctor suggested cutting oxygen supply. Later it turned out that no such mock drill was conducted. I failed to see why a long explained series is required on this matter! पूरे मामले में कोई दम ही नहीं। फ़ालतू में बहूत लंबी लंबी समाचार लिखे जा रही है। केसस्टडी बनाने के लिए और भी हज़ार ग़म है दुनिया में।

Absenteeism

: 2 Mumbai Police Constables stopped reporting to work since 2012. They were put on suspension. Suspended officials are also eligible to receive 50-75% of salary. So without going for work, they continue to receive salary till 2021. Points to Consider: [1) biometric attendance system [2) Online Dashboard to send alert signals to higher official for such absentee constable teachers clerks. [3) if they were working in a private sector company they would have been removed very early. [4) in government jobs too much job security / too many layers of immunity and appeals in suspension/dismissal matters= encourages absenteeism= harms good governance. मुंबई के दो पुलिसकर्मी तबादले के बाद नए थाने में हाज़िरी ही नहीं लगा रहे थे. उन्हें सस्पेंड किया गया किन्तु सस्पेंड होने पर भी सरकारी कर्मचारी को अपनी मूल तनख्वा था 50-75प्रतिशत हिस्सा हर महीने दिया जाता है। तो ये दो पुलिसकर्मी पिछले दस सालों से इसी तरह बिना काम किए तनख्वा खा रहे थे. विचाराधीन विषय? डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से इस प्रकार के मुफ़्तख़ोर और गैरहाज़िर रहने वाले सरकारी कर्मियों पर सख़्ती की जाए। यदि पुलिस कर्मी शिक्षक डॉक्टर और नर्स ही गैरहाज़िर रहेंगे तो तहसील जिला स्तर पर सुरक्षा और सुशासन का प्रबंध मुश्किल। यदि निजी कंपनी इस प्रकार की गैरहाजिरी होती तो कर्मी को तुरंत निकाल दिया जाता है। सरकारी नौकरी में अनावश्यक रूप से कार्मिक-प्रशासन/ वेतन/ बर्खास्तगी के ख़िलाफ़ बोहोत ज़्यादा सुरक्षा के प्रावधान होते है। जिसके तहत आलसी और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों को भी हटाना बोहोत मुश्किल हो जाता है।

Chennai’s Stanley Medical College

under probe because MBBS students forced to arrange money/accommodation/5-star aiyyashi for external examiners for oral/lab exams- otherwise veiled threat that student may be failed if he doesn’t pay Rs.10,000k minimum. Even if Student makes complain the investigation gives no result because oral / viva exams are discretionary in nature. External evaluator may ask very easy question to those who have paid money but tough questions to those who have not. As education secretary [IAS] how will you address this complain? छात्रों को चेन्नई के कॉलेज का आदेश आपकी लेब/प्रायोगिक/ मौखिक परीक्षा के लिए जो बाहर से परीक्षक आ रहे हैं- उनके रहने खाने और अय्याशी के लिए दस-दस हज़ार रुपये चंदे में देने होंगे। यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपको परीक्षा में फ़ेल भी किया जा सकता है. हालाँकि छात्र ऐसी शिकायत भी करें तो साबित करना काफ़ी मुश्किल होता है क्योंकि मौखिक परीक्षा में कितने आसान या कठिन प्रश्न पूछने हैं वह प्रोफ़ेसर के विवेक पर निर्भर होता है. शिक्षा सचिव के रूप में आप इस शिकायत को कैसे संबोधित करेंगे?

Education management: i

n Gujarat’s Chhota Udaipur District, Number of students passing from class 10 to 11 less than 50% so accordingly very few number of government and private sector schools are present for class 11-12. Now,2021: due to Corona mass-promotion all class 10 students have been passed. And everyone wants to do class 11 so need to accommodate 15,000 extra students (who would have failed otherwise in an ordinary year if exam was conducted). But there are not enough number of classrooms and teachers. Many students from poor /lower middle classes families can’t afford to reside in other districts’ hostels. As education secretary (IAS) how will you address this? Points to consider? 1) running schools in two shifts. Morning and noon but then how will you address the shortage of teachers? Government does not have enough funds to hire more teachers 2) Odd – even formula in physical class versus online class. E.g. On Monday only roll number 1-3-5-7 Will come in the classroom while roll number 2-4-6-8 Watch it from home online. But since this is a backward (=aspirantion) district, so most of the families are poor and cannot afford Internet laptop electricity. गुजरात के छोटा उदयपुर ज़िले में सामान्य रूप से 50 प्रतिशत बच्चे दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं में असफल रहते हैं, तो उसी अंदाज़े से वहाँ पर मर्यादित संख्या में ग्यारहवीं कक्षा के विद्यालय और शिक्षक नियुक्त है. हालाँकि अब कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2021 में बिना परीक्षा दिए दसवी कक्षा के सभी छात्रों को पास किया गया है- और उसमें से ज़्यादातर बच्चे ग्यारहवीं कक्षा में दाख़िला लेना चाहते हैं किन्तु इतने तो विद्यालय और शिक्षक ही मौजूद नहीं है. के शिक्षा सचिव के रूप में आप इस समस्या को कैसे संबोधित करेंगे? ज़्यादा शिक्षकों की नियुक्ति हो नहीं सकती क्योंकि सरकार के पास पैसा कम है. ऑड ईवन रोल नम्बर के स्वरूप में बच्चों को अलग अलग दिनो पर बुलाया जाए कुछ बच्चों को प्रत्यक्ष शिक्षा और कुछ बच्चों को ऑन लाइन शिक्षा दी जाए लेकिन उन सब में भी इंटरनेट लैपटॉप की उपलब्धता इत्यादि समस्याएं हैं।

Freedom to make Movies:

Film ‘Nyay: The Justice’ based on the death of Bollywood actor Sushant Singh Rajput (SSR). Some petitioners want to stop the release of this movie because they feel it unnecessarily villifies certain people merely based on media trials and speculative conjectures. Even though a disclaimer is given in front of the movie that it is fictional work, still audience will draw conjectures. This will do real damage to reputation of real people associated with the SSR. As the Censor Chief, how will you address the petition by such people. बॉलीवुड फ़िल्म स्टार सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु पर बना चलचित्र। कुछ लोग इसके प्रसारण का विरोध कर रहे हैं कि बिना न्यायालय के फ़ैसले आए, सिर्फ़ मीडिया-मुक़दमे में कुछ लोगों को दोषारोपित किया गया, उनहि को एसी फ़िल्मों में खलनायक के रूप में दिखाकर जीवित व्यक्तीयो का चरित्र हनन हो रहा है। अब चाहे फ़िल्म की शुरुआत में ऐसे ही वैधानिक सूचना जारी की जाएगी इस कहानी के सारे पात्र काल्पनिक है फिर भी प्रेक्षक तो अंदाज़ा लगा ही लेंगे की बात किसकी हो रही है अतः इस फ़िल्म के प्रसारण पर रोक लगनी चाहिए ऐसी माँग/अर्जी को सेंसस अध्यक्ष के रूप में आप केसे संबोधित करेंगे?

Superstition

: Pratapgarh (UP): People built a “corona mata” temple, seeking divine grace to stay clear of the infection. However, the temple was later demolished because other people claimed the land belonged to them, and the temple construction was done to illegally occupied the land. Points to Consider: given this level of superstition despite >70% literacy rate (Census-2011) = Scientific temper needs to be inculcated in the public. Otherwise religious monuments constructed illegally grab land. If authorities try to remove the encroachment then rioting by mob. Such superstitious people will even avoid taking vaccination → endangering themselves and other public at large अंधश्रद्धा/अंधविश्वास: उत्तर प्रदेश में कुछ लोगों ने कोरोना माता का मंदिर बनाया यहाँ पर पूजा करने से कोरोना माता आपको महामारी से बचाएगी! हालाँकि उन्होंने जिस ज़मीन पर यह मंदिर बनाया था वहाँ कुछ और लोग भी अपना अधिकार बता रहे थे और अतिक्रमण/ ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़े के आरोप में सामने वाले पक्ष ने इस मंदिर को तोड़ दिया। विचारार्थ विषय: वैसे लोगों में साक्षरता तो है किंतु फिर भी अंधविश्वास है यानी विज्ञान का प्रसार बढ़ाना और ज़रूरी। अंधविश्वास का फ़ायदा उठाकर ढोंगी लोग ग़ैर क़ानूनी रूप से ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करते हैं, यदि जिला प्रशासन उसे तोड़ने जाता है तो वही सब गंवार लोग दंगा कर के आइएएस/आइपीएस की समस्या बढ़ाते हैं।

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    Indian History Freedom Struggle Pratik Nayak

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